यूपी में शिक्षा क्रांति! योगी सरकार ने शिक्षा में किए बड़े बदलाव, जानिए पूरी डिटेल


लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने सरकारी आवास पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का खजाना जनता के हित के लिए है और इसका उपयोग बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश का कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन न रहे। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस शिक्षा की गुणवत्ता पर है और हर विद्यालय में शिक्षक-student अनुपात संतुलित होना चाहिए। उन्होंने "ऑपरेशन कायाकल्प" के तहत विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के प्रयासों पर संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, पेयजल, अच्छे फर्नीचर, बिजली, बाउंड्री वॉल, और क्लासरूम की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया गया है।


मॉडल विद्यालय और पीएमश्री योजना का विस्तार

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों और मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण करा रही है। 26 जनपदों में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यालयों हेतु धनराशि निर्गत की जा चुकी है, जबकि 58 जनपदों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यालयों के लिए भी धन स्वीकृत हुआ है। इन विद्यालयों में प्लेग्राउंड, क्राफ्ट, माटी कला और आधुनिक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि 2023-24 में 925 तथा 2024-25 में 785 विद्यालयों को पीएमश्री योजना के अंतर्गत उच्चीकृत किया जा रहा है। इन विद्यालयों को इंटीग्रेटेड कैंपस के रूप में विकसित करने की प्राथमिकता है।

डायट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 डायट संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन संस्थानों में साफ-सफाई, बेहतर संसाधन और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। आईआईएम लखनऊ और बेंगलुरु जैसे संस्थानों को प्रशिक्षण मॉड्यूल से जोड़ने की भी योजना है।

शिक्षा में सुधार के सकारात्मक परिणाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का असर ACER रिपोर्ट में दिख रहा है। वर्ष 2024 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश शीर्ष प्रदर्शनकारी राज्यों में शामिल हो गया है। प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति 2010 में 57% थी, जो 2024 में बढ़कर 71.4% हो गई है। बालिकाओं का नामांकन भी बालकों से अधिक है।

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स्कूल चलो अभियान व समर कैंप की योजना

मुख्यमंत्री ने 1 से 15 अप्रैल और जुलाई माह में 15 दिन तक ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान बच्चों के लिए उत्सव जैसा होना चाहिए। साथ ही, गर्मियों में डेढ़ घंटे के समर कैंप आयोजित कर बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने पर बल दिया।


कस्तूरबा विद्यालयों के विकास व शिक्षकों के प्रशिक्षण पर बल

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को खेलों और प्रशासनिक सेवाओं में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सशक्त बनाने पर भी जोर दिया गया।

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सरकारी योजनाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि आरटीई के अंतर्गत नामांकित बच्चों की संख्या 2016-17 में 10,784 से बढ़कर 2024-25 में 4.58 लाख हो गई है। शारदा कार्यक्रम के अंतर्गत 7.77 लाख बच्चों का प्रवेश कराया गया है। वर्तमान में 1.93 करोड़ विद्यार्थी परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।

2024-25 के बजट में शिक्षा के लिए 85,726 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने, बच्चों को यूनिफॉर्म, स्वेटर, बैग, जूता, मोजा के लिए 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से दिए जा रहे हैं। स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब्स और टैबलेट के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को भी बढ़ावा मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है।

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