खड़े होकर पानी पिएं या बैठकर? प्रेमानंद महाराज जी की सलाह पर डॉक्टरों ने भी मानी हामी


पानी जीवन का आधार है। आयुर्वेद में इसे औषधि माना गया है, लेकिन पानी पीने का तरीका सही न हो तो यह शरीर के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज जी ने भी पानी पीने की आदतों पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को इसकी सही विधि समझाई है। आइए जानते हैं खड़े होकर पानी पीने के नुकसान और सही तरीका क्या है।

खड़े होकर पानी पीने से सेहत पर दुष्प्रभाव

आकाश हेल्थकेयर के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विक्रमजीत सिंह के अनुसार, खड़े-खड़े पानी पीने से शरीर को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं:

  1. पाचन तंत्र पर असर: खड़े होकर पानी पीने पर पानी तेजी से पेट में गिरता है, जिससे पेट पर दबाव बढ़ता है। इसका सीधा असर इसोफैगस के स्फिंग्टर पर पड़ता है, जो ढीला होकर एसिड रिफ्लक्स और एसिडिटी की समस्या उत्पन्न कर सकता है।

  2. आंतों में गड़बड़ी: पानी तेजी से आंतों में जाने के कारण पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता। इससे इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ जाता है।

  3. किडनी पर प्रभाव: किडनी में पानी का उचित अवशोषण न होने से विषैले तत्व शरीर में रह जाते हैं, जिससे किडनी की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

  4. नसों में कमजोरी: इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन नसों को प्रभावित करता है, जिससे थकान, कमजोरी और दिमागी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है।

  5. घुटनों में दर्द: लगातार खड़े होकर पानी पीने से जोड़ों में इलेक्ट्रोलाइट्स क्रिस्टल के रूप में जमा हो सकते हैं, जिससे सूजन और घुटनों में दर्द की समस्या होती है।



पानी पीने का सही तरीका

संत प्रेमानंद महाराज जी और विशेषज्ञों के अनुसार:

  • बैठकर पानी पिएं: हमेशा शांत मुद्रा में बैठकर पानी पिएं।
  • धीरे-धीरे सिप लें: एकदम गटकने के बजाय, छोटे-छोटे घूंट लें।
  • बर्तन में पानी रखें: प्लास्टिक बोतल से सीधे पीने के बजाय पानी को गिलास में लेकर पिएं।
  • समय का ध्यान रखें: पानी पीने के बीच कम से कम 30 मिनट का अंतर रखें।
  • पर्याप्त मात्रा में पिएं: व्यक्ति के वजन, गतिविधि और मौसम के अनुसार पानी की मात्रा अलग हो सकती है, लेकिन औसतन दिन में 2 लीटर पानी पीना आवश्यक है।

पानी केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं है, बल्कि शरीर के लिए एक आवश्यक औषधि है। इसे सही तरीके से पीने से न केवल शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि पाचन, किडनी और नसों की कार्यक्षमता भी बेहतर रहती है। इसलिए अगली बार जब भी पानी पिएं, ध्यान रखें—बैठकर, धीरे-धीरे और सहेज कर पिएं।

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