बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में नियोजित शिक्षकों और विशेष श्रेणी के शिक्षकों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही शिक्षकों को सेवा निरंतरता का लाभ देने पर भी उचित निर्णय लिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में घोषणा की कि इस मुद्दे की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता शिक्षा सचिव करेंगे। कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आवश्यक निर्णय लेगी।
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अप्रैल तक आ सकती है रिपोर्ट
विधान परिषद में सीपीआई के संजय कुमार सिंह, जदयू के संजीव कुमार सिंह, कांग्रेस के मदन मोहन झा और भाजपा के नवल किशोर यादव समेत 11 सदस्यों ने इस मामले पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया था। इस पर भाजपा नेता नवल किशोर यादव ने सवाल किया कि कमिटी की रिपोर्ट कब तक आएगी। इस पर सभापति अवधेश नारायण सिंह ने आग्रह किया कि रिपोर्ट अप्रैल के अंत तक आ जानी चाहिए।
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शिक्षकों को मिलेंगी राज्यकर्मी की सुविधाएं
शिक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि नियोजित शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा के बाद राज्यकर्मी का दर्जा दिया गया है। इससे उन्हें कुल वेतन में लाभ मिल रहा है और वे राज्यकर्मियों को मिलने वाली सभी सुविधाओं के हकदार होंगे। सेवांत लाभ भी दिया जाएगा।
वरिष्ठता और वेतन विसंगतियों पर भी विचार
विधान परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान एमएलसी संजय कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान में माध्यमिक शिक्षकों से अधिक वेतन प्राथमिक शिक्षकों को मिल रहा है, जो एक विसंगति है। जदयू के संजीव सिंह ने कहा कि संवर्ग परिवर्तन की स्थिति में शिक्षकों की वरीयता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सभापति ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि सभी सेवा संवर्ग में वरीयता का लाभ मिलना चाहिए।
राज्य सरकार शिक्षकों की वेतन विसंगति और सेवा निरंतरता को लेकर जल्द फैसला लेगी, जिससे हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।