फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले 22 शिक्षकों पर कार्रवाई, 15 करोड़ रुपये की होगी रिकवरी



Mirzapur: बर्खास्त शिक्षकों से 15 करोड़ रुपये की वसूली की तैयारी

बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले 22 शिक्षकों से वेतन रिकवरी की प्रक्रिया तेज कर दी है। इनमें से 11 बर्खास्त शिक्षकों के वेतन का पूरा हिसाब मिल चुका है।

12 साल में 15 करोड़ रुपये का हुआ भुगतान

लेखा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इन 11 शिक्षकों को 12 वर्षों में लगभग 8 करोड़ रुपये वेतन के रूप में दिए गए। पूरे 22 शिक्षकों पर नजर डालें तो यह आंकड़ा 15 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। विभाग जल्द ही सभी फर्जी शिक्षकों की सूची उनके गृह जनपद के जिला प्रशासन को सौंपेगा। इनमें सबसे ज्यादा शिक्षक जौनपुर, प्रयागराज और गाजीपुर से हैं।

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ऑनलाइन सत्यापन में खुली फर्जी शिक्षकों की पोल

जिले में 885 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों में चार हजार से अधिक शिक्षक तैनात हैं। एक दशक पहले तक नियुक्ति प्रक्रिया कागजों में ही चलती थी, लेकिन पिछले पांच वर्षों में प्रेरणा पोर्टल पर ऑनलाइन सत्यापन से फर्जी शिक्षकों का भंडाफोड़ होने लगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों की डिग्रियां संदिग्ध पाई गईं। सत्यापन में 22 शिक्षक दूसरे के प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करते पाए गए।


2023 से मार्च 2025 तक 22 शिक्षक बर्खास्त

बेसिक शिक्षा विभाग ने सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर 2023 से मार्च 2025 के बीच 22 शिक्षकों को बर्खास्त किया। 2023 और 2024 में बर्खास्त 11 शिक्षकों के वेतन की रिपोर्ट लेखा विभाग ने सौंप दी है, जबकि अन्य शिक्षकों की जानकारी जुटाने का काम जारी है।

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जल्द होगी सख्त कार्रवाई

बेसिक शिक्षा विभाग अब जिला प्रशासन के सहयोग से इन शिक्षकों से वेतन की वसूली करेगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकी जा सके।

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