सुप्रीम कोर्ट ने संविदा कर्मी नियमितीकरण के रास्ते खोले, कहा उमा देवी फैसले का दुरुपयोग नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: उमा देवी फैसले का गलत उपयोग

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उमा देवी (Uma Devi) के 2006 के फैसले का गलत उपयोग किए जाने की आलोचना की है। यह निर्णय पहले अवैध नियुक्तियों को रोकने के लिए था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल लंबे समय से काम करने वाले कर्मचारियों के नियमितीकरण को नकारने के लिए किया जा रहा है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने जग्गो और अन्य बनाम भारत संघ (Jago and Others v. Union of India) मामले में निर्णय देते हुए इन कर्मचारियों के नियमितीकरण और पुनर्बहाली का आदेश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि (Case Background): यह मामला चार कर्मचारियों, जिनमें से कुछ ने 10 से 20 साल तक सीडब्ल्यूसी (Central Water Commission) में काम किया था, से संबंधित था। इन कर्मचारियों को शुरू में तदर्थ और अंशकालिक आधार पर नियुक्त किया गया था, और वे कार्यालय के दैनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। 2018 में उनकी सेवाएं बिना पूर्व सूचना के समाप्त कर दी गईं, जिससे वे न्यायालय का रुख करने पर मजबूर हुए।

महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे (Key Legal Issues):

1. उमा देवी फैसले का गलत उपयोग (Misapplication of Uma Devi Judgment): सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उमा देवी फैसले का उद्देश्य अवैध नियुक्तियों को रोकना था, न कि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों को छीनना।

2. नियुक्ति की प्रकृति और कार्य (Nature of Appointment and Work): न्यायालय ने माना कि अपीलकर्ताओं का कार्य केवल तात्कालिक या आकस्मिक नहीं था, बल्कि सीडब्ल्यूसी के नियमित कार्यों का अभिन्न हिस्सा था।

3. प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन (Violation of Natural Justice): इन कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना के बर्खास्त किया गया, जो प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) का उल्लंघन था।

4. भेदभाव (Discrimination): न्यायालय ने देखा कि अन्य कर्मचारियों को नियमित किया गया, जबकि इन कर्मचारियों को भेदभावपूर्ण तरीके से वंचित रखा गया।

5. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualifications): न्यायालय ने कहा कि शैक्षणिक योग्यता को अब लागू करना अनुचित था, क्योंकि इन कर्मचारियों ने वर्षों तक काम किया था और किसी भी शिकायत के बिना काम करते रहे थे।

6. आउटसोर्सिंग का प्रयास (Attempt of Outsourcing): सीडब्ल्यूसी ने इन कर्मचारियों के कार्यों को निजी एजेंसियों को सौंपने का प्रयास किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें नियमित करने से बचने के लिए यह किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश (Supreme Court's Directives):

1. बर्खास्तगी आदेश रद्द (Cancellation of Termination Orders): कोर्ट ने 2018 में बर्खास्त किए गए कर्मचारियों के आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें मनमाना करार दिया।


2. पुनर्बहाली और नियमितीकरण (Reinstatement and Regularization): कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया गया और उनकी सेवाओं को नियमित किया गया।

3. सेवा निरंतरता (Service Continuity): हालांकि, उन्हें पिछले समय का वेतन नहीं दिया जाएगा, लेकिन उनकी सेवा अवधि को उनके सेवानिवृत्ति लाभों (Retirement Benefits) के लिए जोड़ा जाएगा।

न्यायालय की टिप्पणियां (Court's Observations): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कर्मचारियों के दशकों तक कार्य करने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, भले ही वे 'अस्थायी' या 'संविदात्मक' थे। यह निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि उमा देवी का निर्णय ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ नकारात्मक रूप से उपयोग नहीं किया जाए जिन्होंने लंबी अवधि तक अपनी सेवाएं दी हैं।

यह निर्णय सरकारी संस्थानों के लिए एक आदर्श है, जो निष्पक्षता (Fairness) और न्याय (Justice) के सिद्धांतों का पालन करते हुए अपने कर्मचारियों को उचित अधिकार देने की दिशा में काम करें।

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